सोमवार, 15 जनवरी 2018

एकाधिकेन पूर्वेण --भिन्नों को दशमलव में बदलने के लिए (1)




भाग-1    (part-1)


[भिन्नों के संबंध में--
*जिसके हर (denominator) के गुणनखंड (factors) में केवल 2 या 5 हो ,उसका दशमलव प्रसार साधारण/ अनावर्ती और सांत(non-recurring and terminating) होता है.
*जिसके हर के गुणनखंड में (एक भी 2 या 5 न हो) 3,7,11,.. आदि हो उसका दशमलव प्रसार आवर्ती और असांत(reccurring and non-terminating) होता है.
*जिसके हर के गुणनखंड  में दोनों तरह की संख्याएं हो उसका दशमलव प्रसार आंशिक रूप से आवर्ती (partially reccurring)और आंशिक रूप से अनावर्ती, और असांत होता है.
* किसी भी भिन्न का दशमलव प्रसार असांत और पूर्णतः अनावर्ती  नहीं हो सकता है.इस तरह के संख्या को अपरिमेय संख्या कहते है.

* 1/20,                 * 1/63,                        *1/6                       * √2     ]


A. हर (denominator) के अंत में 9 हो: जैसे 1/19, 1/29, 148/149, 1998/1999, आदि

1/19 का दशमलव प्रसार करने के लिए -- 

➤ 19 में पूर्व अंक है '1', 1 का एकाधिक है 2 .

बाएं से दायें हल पाने के लिए (भाग विधि): 

  • सहायक भिन्न (auxiliary fraction)/ A.F. होगा--->



  •   0.   लिखने के बाद 1 को 2 से भाग देना है :भागफल(quotient) Q=0 और शेषफल(remainder) R=1 आएगा, इस 0 को दशमलव के बाद और 1 को इसी 0 के नीचे लिखेंगे .
     --    1 यहाँ 0 के उपसर्ग के रूप में है.
  • अगला भाज्य(next dividend)/N.D. है-- 10,इसको फिर 2 से भाग देना है: Q=5; R=0, इस 5 को   0.0 के बाद और 0 को इसी 5 के नीचे लिखेंगे.
  • N.D. है-- 05 या 5,इसको 2 से भाग देने पर: Q=2 और R=1, इस 2 को 0.05 के बाद और 1 को इसी 2 के नीचे लिखेंगे.
  • N.D. है-- 12, इसको 2 से भाग देने पर: Q= 6 और R=0, इस 6 को 0.052 के बाद और 0 को इसी 6 के नीचे.
  • इस तरह से जारी रखेंगे 2 से भाग देना.
  • --- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
  • --- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
  • अंत में आ जायेगा 1 और इससे आगे बढ़े तो फिर से सभी अंक दुहराने लगेंगे क्योंकि 1 से हमने सुरुआत किया था.
     
यदि हम R=0 को प्रत्येक बार न भी लिखें तो कोई अंतर नहीं होता है.--


दायें से बाएं  हल पाने के लिए (गुणा विधि):

  • एकाधिक 2 है.
  • दशमलव प्रसार में सबसे अंतिम आवर्ती(repeating) अंक 1 होगा(#क्यों ?- आगे बताएँगे)**.
  • सबसे दायें में 1 लिखकर, उसे 2 से गुणा करेंगे, 1x2=2 इस 2 को 1 के बाएं (left) में लिखेगे.
  • फिर 2 को 2 से गुणा करेंगे:2x2=4
  • फिर 4x2=8 इस तरह हम पाते हैं--[ ...........................8421]
  • फिर 8x2=16 अब होगा,  [........................... 168421]
  • फिर 6x2+1= 13 अब होगा,  [.......................... 13168421
  • फिर 3x2+1 =7 अब होगा,  [.........................713168421]
  • और इस तरह से तब तक गुणा करेंगे जब तक 1 पर न पहुँच जायें.हम 1 आने से ठीक पहले रुक जायेंगे.


  •   [.105126311151718914713168421] इससे आगे फिर 1 आ जायेगा.
    ...
* एक अन्य विधि से हमारा कार्य आधा हो जाता है. हम जानते हैं की 1/19 के दशमलव प्रसार में आवर्ती अंकों (repeating digits) की संख्या (19-1=) 18 होती है. तब यदि पहले के नौ(nine) अंक पता हो तो आख़िरी के नौ अंक सीधे ही मिल जायेंगे और इसी तरह आख़िरी वाले पता हो पहले वाले मिल जायेंगे.

जैसे : 1/19 में आख़िरी नौ है -- 947368421
                                         +   052631578--पहले के नौ अंक
                                              --------------------
                                              999999999




#क्यों **  1 को मानक अंश(standard numerator) कहा जाता है. और यदि हर(deno.) के गुणनखंड में एक भी 2 या 5 न हो तो भिन्न का दशमलव प्रसार आवर्ती होता है.  इस स्थिति में, यदि 1/(..a) = 0. ......b हो तो a.b = ..9 होता है.
जैसे-1/11 =0.09..0909..  ;1x9 =9
        1/19= 0. ...........1.. ; 9x1 =9.
        1/13= 0. ...........3.. ; 3x3 =9.
        1/ 7= 0. ............7.. ;7x7 =49 अर्थात a और b के गुणनफल का अंतिम अंक 9 ही होगा.
* अगर मानक अंश वाले भिन्न का दशमलव प्रसार सांत हो तो a और b का गुणनफल का अंतिम अंक  0 होगा.

भाग विधि से (बाएं से दायें) कुछ और उदाहरण --
उदाहरण-1.

--इस उदाहरण में 1/49 का सहायक भिन्न (A.F.)  0.1/5 है  क्योंकि 4 का एकाधिक 5 है.

  • 0. लिखने के बाद 1 को 5 से भाग देंगे. तब Q=0 और R=1 मिलेगा.(इसे लिखेंगे-- 10).
  • अगला भाज्य (N.D.) है: 10 =10, 10 को 5 से भाग देने पर Q=2 और R=0 मिलेगा.(इसे लिखेंगे--02)  
  • N.D. है: 02 = 2, इसे 5 से भाग देने पर Q=0 और R=2 मिलेगा.(इसे लिखंगे-- 20)
  • N.D. है :20 इसे 5 से भाग देने पर Q=4 और R=0 मिलेगा.
  • ------------------------------------------------------------
  • --------------------------
और इस तरह से जितने अंक चाहिए उतना भाग करते जायेंगे.अंतिम आवर्ती अंक 1 आएगा इसके बाद भी भाग करते रहे तो फिर से 0204... आने लगेंगे.
उदाहरण-2.

उदाहरण-3.


ऊपर के उदाहरणों में अंश (Num.), हर(Deno.) से छोटा है. इस तरह के भिन्नों को उचित /सरल  भिन्न(proper fraction) कहते हैं.


जब अंश (Num.), हर (Deno.) से बड़ा हो.

इस तरह के भिन्नों को विषम भिन्न (improper fraction) कहते हैं.
जैसे-  51/49 
उदाहरण-1.  51/49;  इसे 1+(2/49) लिखा जा सकता है.
इस तरह के भिन्नों को 1+ (2/49) लिख कर बना सकते हैं, और 2/49 को तो पहले की तरह हल करके उसे 1 के साथ जोड़ देंगे.



1+ 0.040816326.......  = 1.0408163326.....

दूसरा तरीका : 51/49 के लिये सहायक भिन्न है 5.1/5

एक महत्वपूर्ण बात, 51>49 है,और  स्पस्ट है की हमारा एकधिक अंक 5 होगा. अब सोचिये 51 को 5 से भाग देने पर दो अंक (Q=10) आ जायेंगे जो कि गलत होगा क्योंकि Q उतने ही अंकों के होने चाहिए जितने 9 हैं 'हर' (49) में. यदि 'हर' 199 हो तो Q में दो अंक होंगे और यदि 6999 हो तो Q में 3 अंक होंगे, ......... . अब एक नया शब्द आता है 'अवशेष अंक'. 5 से छोटे या बराबर अंक को 5 से भाग दे सकते हैं. अब जो 5 के बाद 1 है वही 1 अवशेष अंक है.   

  • 5 को 5 से भाग देंगे, Q=1 और R=0
  • अगला भाज्य है 01 या 1, लेकिन 1 में 1 जोड़ना भी होगा.इस तरह वास्तविक भाज्य हुआ 2.   2 को 5 से भाग देने पर Q=0 और R=2.
  • अगला वास्तविक भाज्य है:20 (यदि 5.1 में 1 के बाद कोई और अंक भी होता तो इस बार उसे जोड़ते) 20 को 5 से भाग देने पर Q=4, R=0.
  • अब सारे कार्य पहले की ही तरह होंगे (जैसा कि 1/19,1/49 आदि में हमने  किया). 


उदाहरण-2.
  इसमें अवशेष अंक 3 और 2 हैं.

उदाहरण-3.
  इसमें अवशेष अंक 8 और 7 है.

  • इसमें 89 को 17 से भाग देने पर,Q=5 और R=4 होगा.
  • अगला भाज्य 45 +8 =53 होगा. इसे 17 से भाग देने पर,Q=3 और R=2.
  • अगला भाज्य 23+7 =30. इसे 17 से भाग देने पर, Q=1 और R=13.
अगला भाज्य 131 है--अब पहले के तरह से भाग देते हुए, जितने अंकों तक दशमलव प्रसार चाहिए उतने भाग करते जाइये.

दशमलव(decimal) का स्थान स्वयं ही समझने का प्रयास करें. उदाहरण 3. में जब हम 7 पर पहुँचे थे उससे ठीक पहले दशमलव दिया गया है.और यह तरीका हर स्थान पर लागू होता है.


एक अन्य प्रकार --
यहाँ हम केवल उचित भिन्न (proper fraction) के दशमलव प्रसार की बात करेंगे.




विस्तार से देखें--
कार्य विधि : 

  • 'हर'(Deno.) में सभी 9 के पहले जो अंक हैं उसे 'पूर्व' मानेंगे और उसी के एकाधिक से सहायक भिन्न बनायेंगे. जैसे-678/69999 का सहायक भिन्न है 0.0678/7.
  • 'हर' में जितने 9 थे उतने अंकों के समूहों में एकाधिक से भाग देना होगा. जैसे-0678 में, चार-चार समूहों में 7 से भाग देंगे.
  • 0678 में 7 से भाग दें तो, Q-समूह =0096 और R=6 होगा.
  • अगला भाज्य-समूह है:60096 =60096, 7 से भाग देने पर Q-समूह =8585 और R=1 होगा.
  • अगला भाज्य-समूह है:18585, 7 से भाग देने पर Q-समूह =2655 और R=0
  • अगला भाज्य समूह होगा 02655 या 2655 जिसे 7 से भाग देने पर Q-समूह में तीन ही अंक मिलेंगे- 379 और शेष(R)=2. ध्यान दें कि हमें चार अंको के समूह चाहिए इसलिए 379 को 0379 लिखेंगे और तब उसके नीचे-बाएं में 2 लगायेंगे.
एक नियम मान लें तो सुविधा होगी: ये जो 4-अंकों का Q-समूह में 7 से भाग दिया जाता है, इसमें पहले अंक को R के साथ भाग देना अनिवार्य है.
जैसे-60096 में R=6 है और Q-समूह का पहला अंक = 0. तो नियम के अनुसार 7 से पहले 60 को भाग देना है और 7x8=56; फिर 40 को 7से, 7x5=35; फिर 59 को 7 से, 7x8=56; फिर 36 को 7 से,7x5=35. और अंतिम भाग में जो शेष आया वह R है, R=1 (इसे लिखेंगे--18585).
           इसी तरह 02655 में पहले 02 को 7 से भाग देंगे, 7x0=0 शेष =2; फिर 26 में 7 से, 7x3=21; फिर 55 में 7 से, 7x7=49; फिर 65 में 7 से, 7x9=63 और R=2.(इसे लिखेंगे-- 20379) *सबसे सुरुआत में R नहीं होता है तो पहले ही अंक को 7 से भाग देकर हम आगे बढ़े हैं.
  • फिर अगला भाज्य समूह होगा 20379.
  • .............................जितने अंक चाहिए उतना भाग देते जाईये.
ऊपर दो और उदाहरण दिए हैं उन्हें समझने का प्रयास करें.



B. 'हर' (denominator) के अंत में 8 हो: जैसे -1/18, 65/68, 1213/1998 आदि

भाग विधि (बाएं से दायें):

1/18 के दशमलव प्रसार पर विचार करते हैं--

'हर' (Deno.) में पूर्व अंक  है '1' और 1 का एकाधिक होगा 2

  • सहायक भिन्न (A.F.) होगा-------->
ये क्या ? 1/19 में भी A.F. यही था.  अगर आपके मन में ये सवाल आया हो तो धैर्य रखें बहुत जल्दी अंतर पता चल जाएगा.
  • A.F.  'हर' के अंतिम अंक पर निर्भर नहीं है  यह तो 'पूर्व अंक' पर निर्भर होता है अर्थात  जिन भिन्नों के हरों के पूर्व अंक एक जैसे होंगे उनके A.F. भी एक ही होंगे.  किन्तु, बाद की क्रियाओं में अंतर है.

  • 0. लिखने के बाद, 1 को 2 से भाग देने पर Q=0 और R=1 होगा.पहले की ही तरह 1 को 0 के नीचे लिखेंगे(RQ अर्थात 10).
  • अगर 'हर' का अंतिम अंक 9 होता तो -- अगला भाज्य =10 =10 होता, लेकिन यहाँ 'हर' है 18 जिसका अंतिम अंक 8 (=9-1) है जो कि 9 से एक कम है , इसलिए अगला भाज्य के लिए 10 में Q गुणे 1 जोड़ना होगा.          [RQ + Q.1]
  • तब अगला भाज्य हुआ -- 10+0 =10
  • इस 10 को 2 से भाग देने पर,Q=5 और R=0 , फिर से भागफल में 5 और उसके नीचे 0 लिख देंगे (05).
  • अगला भाज्य होगा: 0+ 5 = 5+5 =10, फिर से 2 से भाग देने पर वही Q और R मिलेंगे और  यह बार-बार होता रहेगा.

एक अन्य आवश्यक बात है जिसे एक और उदाहरण देकर हम समझायेंगे.-----

25/28 का दशमलव प्रसार करेंगे.
  • सहायक भिन्न होगा ---     2.5/3
  • 2.5 में 3 से भाग देने पर Q=8 और R=1 होगा (18).
  • अगला भाज्य होगा- 18+8 =26
26 को 3 से भाग देने पर Q=8 और R=2 होगा अर्थात RQ = 28 लेकिन अब इसके बाद वाले भाज्य पर विचार कीजिये  28 +8 =28+8=36.  ध्यान दें  36 को 3 से भाग देने पर Q में दो अंक मिलेंगे जो कि गलत है.
  • 26 को 3 से 8 बार में नहीं बल्कि 8 से एक अधिक , 9 बार में भाग देंगे.इस तरह तो Q=9 मिला और R= -1 होगा [3x9+(-1) =26].
  • अगला भाज्य होगा-  [पहले 19 और -19 में अंतर समझ लें]   -19+9 = -1+9=8.

  • 8 को 3 से भाग देने पर,Q=2 और R=2.(इसे लिखेंगे  22).
  • अगला भाज्य होगा-   22+2 =24 इसे 3 से भाग देने पर, Q=8 और R=0.(इसे लिखेंगे 08)
  • अगला भाज्य होगा-  8+8=16,इसे 3 से भाग देने पर Q=5 और R=1.(इसे लिखेंगे 15)
  • अगला भाज्य होगा 15+5=20, 3 से भाग देकर Q=7 और R= -1.
  •   -----------------------------------------------
  • ---------------------------------


जब अंश > हर हो.  (improper fraction के लिए)

135/28
यहाँ 'हर' है 28 जिसमें पूर्व अंक है- 2 और 2 का एकाधिक होगा 3.इसलिए 135/28  का दशमलव प्रसार करने के लिए सहायक भिन्न होगा: 13.5/3  .
इसमें अवशेष अंक है: 5 (याद कीजिये 51/49 जिसमें अवशेष अंक 1 था.)

  •  13 को 3 से भाग देने पर, Q=4 और R=1; (इसे लिखेंगे-- 14).
  • अगला भाज्य: 14+4 =14+4=18 और इसमें अवशेष अंक 5 जोड़ने पर, 18+5=23 होगा; 23 में 3 से भाग देने पर Q=8 और R= -1; (इसे लिखेंगे-- -18).
  • अगला भाज्य:  -18+8=(-10+8) +8=6 (यदि और भी अवशेष अंक होता तो उसे अभी जोड़ देते); 6 को 3 से भाग देने पर, Q=2 और R=0.  (इसे लिखेंगे-- 02 )
  • अगला भाज्य 02+2 =4, 3 से भाग देने पर, Q=1 और R=1 (इसे लिखेंगे-- 11)
  • अगला भाज्य: 11+1 = 12, 3 से भाग देने पर, Q=4 और R=0.(इसे लिखेंगे-- 04).
  • अगला भाज्य: 04+4 =8, 3से भाग देने पर, Q=2 और R=2.( इसे लिखेंगे-- 22).
  • -----------------------------------------------------
  • --- भाग देते जाइये , जितने अंकों तक दशमलव चाहिए उससे एक अधिक बार भाग दीजिये क्योंकि कभी कभी R ऋणात्मक भी लाना पड़ता है जैसे- यहाँ दुसरे step में हमने किया.





*हमने 'हर' के अंतिम अंक का '9 से 1 कम' होने के कारण से RQ के स्थान पर RQ + (Q गुणे 1) या RQ + Q को अगला भाज्य बनाया.
*इसे एक और तरीके से देख सकते हैं: (8 से अंत होने वाले) 'हर' का  अंतिम अंक '10 से 2 कम' होगा इसलिए RQ के स्थान पर अगला भाज्य होगा: RQ + Q  =(10R + Q) + Q =10R+2Q = R(2Q) या RQ''  .
जैसे:19 =>अगला भाज्य =28   [19'' =10+18=RQ''] या   [(10+9)+9=RQ + Q]    

एक और उदाहरण देखिये--




एक अन्य प्रकार
तीन आवश्यक बातें-

  1. 1698 को 1700 अनुमानित किया गया है इसलिए Q प्रत्येक बार दो और सिर्फ दो अंकों का होगा.
  2. पिछले बार की ही तरह, प्रत्येक बार अगला भाज्य RQ + Q या RQ'' होगा. जैसे-  1011 (Q=11, R=10) से अगला भाज्य मिलेगा: 1011 + 11=1022 ;  या R22=1022=1022.
  3. कभी भी (अगला ) भाज्य 1700 या इससे अधिक नहीं होना चाहिए यदि ऐसा हुआ तो  17 से भाग देने पर Q तीन अंकों का आ जायेगा जो कि गलत होगा. ऐसी स्थिति में ऋणात्मक R प्राप्त करना चाहिए . जैसे- 968 में 17 से भाग देने पर,Q=56 और R=16 अब इसका अगला भाज्य का सोचिये  वह तो 1656 + 56 =1712  इसलिए Q =57 कर दिया गया जिससे R= -1 मिला और साथ ही अगला भाज्य 14 हुआ.*
*14 को Q=00 और R=14 किया गया.

  • दो लाइनों के बीच भाज्य लिखा गया है. पहला भाज्य 197 है, दूसरा भाज्य 1011 से 1022  मिला .......
  • स्पष्ट है की दशमलव एक अंक के बाद होगा अर्थात 1.16018......




***आशा है आपको सब समझ में आ रहा होगा. यदि कोई कठिनाई हो रही हो तो comment करके बतायें.  आप facebook page पर भी जाकर सवाल कर सकते हैं.

जब हर का अंतिम अंक 7 ,6,5,4,3,2,या 1 हो तब भिन्न का दशमलव प्रसार कैसे होगा जानने के लिए -------    


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सोमवार, 25 दिसंबर 2017

वैदिक गणित के 13 उपसुत्र-अर्थ,प्रयोग और उदाहरण 13 upsutras of vedic mathematics

पिछले post में हमने 16 सूत्रों पर चर्चा किया था अब हम 13 उपसुत्रों पर बात करेंगे .....

1.आनुरुप्येण

अर्थ :अनुपात से / अनुरूपता से

प्रयोग :संख्याओं के गुणा में, किसी संख्या का घन (cube) ज्ञात करने में; सरल द्विघाती समी०(simple quadratic eq.n) और सरल युगपत समी०(simultaneous eq.n )  हल करने में,  किसी संख्या को दो संख्याओं के वर्गों के योग या वर्गों के अंतर के रूप में व्यक्त करना.
उदाहरण:हम यहाँ किसी संख्या का घन --का उदाहरण दे रहे हैं.

12 का घन= 12^3=    

चरण 1.  हम 12 के अंकों को देखेंगे-- 1 और 2 का अनुपात 1:2 है.
चरण 2.  1 का घन (cube) लिखेंगे ---  1^3 =1
चरण 3.  अब अंकों का अनुपात 1:2* है इसलिए दुसरे चरण में प्राप्त संख्या को 2 से गुणा* कर लिखते जायेंगे (तीन बार)--- 1  2   4   8.

चरण 4.  बीच के दो संख्याओं का दुगुना कर उन्हीं के नीचे लिख देंगे--- 2 और 4 का दुगुना 4 और 8 है.

चरण 5.अब दायें से बाएं जोड़ना है---यदि जोड़ में एक से अधिक अंक आये तो उसे उसके बाएं वाले में जोड़ देना है,जैसे 8+4=12 का 2 लिखा गया और 1 को अगले में 2+4+1=7 कर दिया गया.

*यदि यह अनुपात 2:5  (=1:  5/2) होता तो पहले तो 2 का घन=2^3=8 लिखते फिर अन्य तीन के लिए 8 को 5/2 से गुणा करते=20, 20x 5/2=50,50x 5/2=125 लिखते. अगले चरण में बीच वाले का दुगुना--40 और 100.और अंत में जोड़ करने से 25 का घन मिलता. 

25^3 =

दायें से बाएं जोड़ने के क्रम में 8\60\150\125-- 8\60\150+12\5-- 8\60\162\5-- 8\60+16\2\5-- 8\76\2\5-- 8+7\6\2\5-- 15\6\2\5.

2.शिष्यते शेषसंज्ञः 


हमने इस सूत्र का अर्थ और प्रयोग खोजने का प्रयास किया,भारती कृष्ण तीर्थजी महाराज की (प्रकाशित हुई) कृति में इस सूत्र का आभाव है.internet में कई स्थानों पर 'शेष' के साथ अन्य बातें लिखी हुई है.वैसे श्रीमद् भागवत में इसके लिखे होने के संकेत हैं.हम निरंतर प्रयासरत हैं जिस भी क्षण हमें कुछ जानकारी मिलती है हम update कर देंगे.


3. आद्यं आद्येन् अन्त्यम् अन्त्येन

अर्थ: प्रथम को प्रथम के द्वारा और अंतिम को अंतिम के द्वारा.  
प्रयोग : इस उपसूत्र का 'आनुरुप्येण' और 'लोपनस्थापनाभ्यां' उपसुत्रों के साथ प्रयोग होता है.इसकी सहायता से द्विघात और त्रिघात व्यंजको का गुणनखंडन किया जाता है.
उदाहरण: 'आनुरुप्येण' के साथ इसका प्रयोग--  द्विघात व्यंजक का       गुणनखण्डन ---चरण1(step 1).--

इसका गुणनखंडन के लिए बीच वाले गुणांक अर्थात 13 को दो भागों में बांटना है जिससे की आदि के गुणांक का आदि भाग से और अंत के भाग का अंत के गुणांक से  आनुरुप्य हो. 13का दो भाग है-- 18;-5.  3:18 बराबर है -5: -30 ;दोनों अनुपात बराबर हैं तब----

चरण 2.   3:18 (या -5: -30) का सरलतम रूप है-- 1:6  इसलिए (x + 6) होगा पहला गुणनखंड.
चरण 3.   3x^2  को x से भाग दें और -30 को 6 से भाग दें-- 3x और -5 आया, इस तरह दूसरा गुणनखंड होगा (3x-5)
  अतः गुणनखंडन है (x+6)(3x-5).



4.केवलैः सप्तकं गुण्यात्

अर्थ :  यह सूत्र वास्तव में संख्यात्मक कूट (numeric code)है, जो कहता है 7 के केस में गुणक 143 होगा.
प्रयोग: इस तरह के और भी कूट हैं--1.'कलौ क्षुद्रससैः' तथा 2.'कंसे क्षामदाहखलैर्मलैः'. इनका प्रयोग भिन्न को दशमलव में बदलने के लिए किया जाता है.
उदाहरण: 
 1/7 =          इसके लिए, 999 x 143=142857

इस तरह 1/7=0.142857  
 इस संख्या में 1, 2, 4, 5, 7, 8 बढ़ते क्रम में हैं.
1/7 के दशमलव प्रसार को पलटने पर----2 के स्थान से बढते हुए --

2/7=0.285714  ;3/7=0.428571--इसके लिए 4 के स्थान से बढ़ते हुए.
4/7=0.571428;  5/7=0.714285;  6/7=0.857142.


5.वेष्टनम्

अर्थ: आश्लेषण करके(by osculation) /आश्लेषक के द्वारा 
प्रयोग:दो तरह के आश्लेषक (osculator)  होते हैं-धनात्मक और ऋणात्मक. इस  सूत्र का प्रयोग किसी संख्या की किसी संख्या से  विभाज्यता जाँच करने में किया जाता है.
उदाहरण:  धनात्मक आश्लेषक के प्रयोग से जाँच करना है कि 5293240096, 139 से विभाज्य है या नहीं .

*आश्लेषण होता क्या है?-- यदि 5 आश्लेषक हो तो 28 का आश्लेषण होगा -- 2+8x5=42; 14 का होगा 1+4x5=21; 21का होगा 2+1x5=7.

अब, 139 का आश्लेषक होगा --  14
5293240096 का 14 से आश्लेषण करेंगे.---  529324009+6x14=529324093;  52932409+3x14=52932451; 5293245+1x14=5293259; 529325+9x14=529451; 52945+1x14=52959; 5295+9x14=5421; 542+1x14=556; 55+6x14=139.  अतः दिया गया संख्या 139 से विभाज्य है(प्रत्येक आश्लेषण से प्राप्त संख्याएँ भी 139 से विभाज्य होगा) .

6.यावदूनं तावदूनम्

अर्थ:जितने की कमी है उतनी और कमी करें.
प्रयोग: यह यावदूनं* सूत्र के समतुल्य है या दोनों एक ही हैं.इसका प्रयोग वही होना चाहिए जो यावदूनं का है.--किसी संख्या का घन ज्ञात करना,किसी संख्या  का चतुर्घात ज्ञात करना.

*16 सूत्रों की सूची देखें.

7.यावदूनं तावदूनीकृत्य वर्गं च योजयेत्

अर्थ:संख्या की आधार से जितनी भी कमी हो उतनी कमी और करें,  और उसी कमी (या विचलन)का वर्ग भी रखें.
प्रयोग:इस उपसुत्र का प्रयोग किसी संख्या का वर्ग ज्ञात करने में होता है.

उदाहरण: 91का वर्ग =91^2=
 यहाँ आधार 100 से 9 की कमी* है,इतनी और कमी करने पर 91-9=82.
फिर कमी का वर्ग =9^2=81.
इस तरह 91^2=8281.

*यदि कमी के स्थान पर आधार से अधिकता होता तो,जितने की अधिकता है उतना और अधिक कर दें.और अधिकता का वर्ग भी रखें. 

जैसे-13 का वर्ग=13^2= 
  यहाँ आधार 10 से तीन की अधिकता है,इतना और अधिक करने पर 13+3=16 और 3 का वर्ग =3^2=9 अतः 13^2=169.

**ध्यान देने की आवश्यकता है -- जब आधार 100 है तब विचलन का वर्ग करने पर दो अंक होने चाहिए,यदि नहीं है तो 0 लगाकर लिखेंगे.और जब आधार 10 है तो एक ही अंक होने चाहिए यदि एक से अधिक अंक आ जाता  है तो दहाई का अंक पहले वाले में जोड़ दें. आधार 1000 हुआ तो--तीन अंक.

8.अन्त्ययोर्दशकेऽपी

अर्थ: पूर्व के अंक एक समान हों और अंतिम अंक का योग भी 10* हो.
प्रयोग:इस सूत्र का एक विशेष प्रयोग है गुणा के लिए,और 5 से अंत होने वाली संख्याओं के वर्ग के लिए.

उदाहरण:64x66=    
इस में (पूर्व) 6 दोनों में है, और 4+6=10 होता है, इसलिए यह सूत्र यहाँ लागू होता है.
पूर्व का एकाधिक लिखें-- 6 का एकाधिक 7 होगा.
6x7\4x6=42\24   इस तरह 64x66=4224

73x77 =7x8\3x7 =56\21 =5621
122x128 =12x13\2x8 =15616

*यदि अंत के संख्या का योग 10 न होकर 100,या 1000, या 100..0.. हो तब भी यह सूत्र लागू होगा. और पूर्व में एक से अधिक अंक भी एक समान हो सकते हैं(122x128). जैसे - 398x302= 3x4\98x2=12\196 =12\0196 =120196.
*#उत्तर के दायें पक्ष में, आधार में जितने 0 हैं उसके दोगुना अंक होंते हैं. आधार 10--अंक दो;आधार 100--अंक 4 ;आधार 1000--अंक 6...... .

9. अन्त्ययोरेव

अर्थ: केवल अंतिम (स्वतंत्र) पद द्वारा ;by constant term only.
प्रयोग:एक विशिस्ट प्रकार के समीकरण को हल करने में.

उदाहरण: इस नीचे लिखे हुए समीकरण में------------------------------------------->

बाएं तरफ अचर पद (constant term) को छोड़ दें तो 3x^2+5x और 5x^2+6x उसी अनुपात में हैं जिसमे कि 3x+5 और 5x+6 हैं.

ऐसी स्तिथि में, यह सूत्र कहता है कि ------------------->

अतः 4x=12  या x=3.


10.समुच्चयगुणितः

 यह सूत्र 'गुणित समुच्चयः ' से भिन्न नहीं है ऐसा प्रतीत होता है.और यदि दोनों में भिन्नता है तो वर्तमान में स्वामी जी की प्रकाशित हुई कृति में उपलब्ध नहीं है.

11.लोपनस्थापनाभ्याम्

अर्थ: (एकांतर से) लोपन और स्थापना द्वारा.
प्रयोग: कठिन द्विघाती व्यंजकों का गुणनखंडन करने में,व्यंजकों का HCF ज्ञात करने में,घन समीकरणों को हल करने में, और बहु युगपत समीकरणों को हल करने में.

उदाहरण:  कठिन द्विघाती व्यंजकों का गुणनखंडन----
इस व्यंजक को हल करने के लिए लोपन और स्थापन करना है (आद्यं.. सूत्र का भी प्रयोग है).

1.)पहले z का लोपन[z=0] और x , y का स्थापन------
 अब जो द्विघात व्यंजक प्राप्त हुआ उसका गुणनखंडन(आद्यं सूत्र से) करेंगे -->  (x+2y)(2x+3y)
 2.)फिर y का लोपन[y=0]और x ,z का स्थापन-------


 फिर से जो व्यंजक प्राप्त हुआ है उसका गुणनखंडन करेंगे- (x+3z)(2x+z)

(x+2y),(x+3z),(2x+3y),(2x+z) इनसे दो पद बनते हैं--
    (x+2y+3z) ; (2x+3y+z)
अतः हमारा गुणनखंड है : (x+2y+3z)(2x+3y+z)

**कभी कभी ये दो पद आसानी से नहीं बनते हैं तब तीनो का लोपन करना पड़ेगा.

12.विलोकनम्

अर्थ: अवलोकन द्वारा (by mere observation)
प्रयोग: सामान्य द्विघात समीकरणों को हल करना,युगपत द्विघात समीकरणों को हल करना, भाग की क्रिया में.
 उदाहरण:   सामान्य द्विघात समी०----  x+ 1/x=  17/4
     विलोकनम सूत्र अवलोकन करने को कहता है जैसे यहाँ  x का मन 4 रखने पर 17/4 मिल जायेगा अतः x=4 होगा इसके लिए और अधिक कुछ नहीं करना है.

13. गुणितसमुच्चयः समुच्चयगुणितः
अर्थ:गुणनखंडों के गुणांकों के योग का गुणनफल, गुणनफल के गुणांकों के योग के बराबर होता है.

**यही अर्थ गुणित समुच्चयः  के लिए भी लिखा गया है.इन दोनों सूत्रों का कोई अलग उपयोग नहीं दिखता है अपितु दोनों सूत्र एक ही हैं या हम इसमें समुच्चयगुणितः को भी ले लें तो भी गलत नहीं होगा.  अगर कोई त्रुटी आपको दिखती है तो सूचित करें. हम बेहतर को और बेहतर बनाने के प्रयास में लगे हुए हैं.





अगले पोस्ट में सभी  सूत्रों पर विशेष चर्चा होगी........ आपको यह post कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया comment करके दें.


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